रणनीतिक विच्छेदन
वैश्वीकरण प्रौद्योगिकी का आविष्कार है।
अमेरिका ने अपना साम्राज्य सेनाओं या नौसेनाओं पर नहीं, प्रौद्योगिकी पर निर्मित किया। इसने जेट इंजन से लेकर औषधि, अंतरिक्ष से इंटरनेट तक, संस्कृति तक फैली प्रौद्योगिकी व्यवस्थाओं के माध्यम से वैश्विक नियंत्रण बनाया। किंतु प्रौद्योगिकी अकेले वर्चस्व की गारंटी नहीं देती। वास्तविक शक्ति उसके बाद आती है। निर्भरता श्रृंखलाएँ [Dependency chains] देशों को अमेरिकी पारिस्थितिकी तंत्र [Ecosystem] में जकड़ती हैं। उन्नयन मार्ग दशकों तक चलते हैं। मानक अमेरिकी प्राथमिकताओं को उन व्यवस्थाओं में अंतर्निहित करते हैं जिनसे अन्य राष्ट्र बच नहीं सकते।
जैसा कि पूर्व अध्यायों में उल्लेख किया गया, यह प्रौद्योगिकी नियंत्रण मुद्रा वर्चस्व और SWIFT अवसंरचना पर टिका है। किंतु कठोर केंद्र प्रौद्योगिकी स्वयं है। इसके बिना वित्तीय व्यवस्था के पास बहुत कम उत्तोलन बचता है।
इस व्यवस्था को समझने के लिए व्यक्तिगत प्रौद्योगिकियों से परे अंतर्निहित वास्तुकला देखनी होगी। प्रत्येक नागरिक नवाचार सैन्य उद्देश्यों की सेवा करता है। प्रत्येक मानक रणनीतिक प्राथमिकताओं को अंतर्निहित करता है। प्रत्येक निर्भरता राजनयिक दबाव के लिए उत्तोलन बिंदु बनाती है।
रणनीति यह है कि नियंत्रण को तकनीकी आवश्यकता या उदार साझाकरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए। देश अमेरिकी व्यवस्थाएँ इसलिए अपनाते हैं क्योंकि वे बेहतर काम करती हैं, न कि इसलिए कि वे रणनीतिक निहितार्थों को पहचानते हैं।
जेट इंजन उत्तोलन
भारत ने 2021 में 99 GE F404 इंजन का आदेश दिया। डिलीवरी 2023 के लिए निर्धारित थी। अचानक आपूर्ति श्रृंखला [Supply chain] की समस्याएँ आईं। समयरेखा 2025 तक खिसक गई। इस बीच, यूरोप के Gripen जेट और दक्षिण कोरिया के KAI T-50 को निर्धारित समय पर इंजन मिले।
यह अक्षमता नहीं थी। यह रणनीतिक समय था। जब भारत ने परमाणु परीक्षण किए या व्यापार शर्तों पर विवाद किया, अचानक विनिर्माण में देरी होती। जब संबंध सुधरे, डिलीवरी फिर शुरू हुई। यह प्रारूप अनेक प्रौद्योगिकियों और देशों में दोहराता है। यूक्रेन के बाद रूस में Boeing का रखरखाव बंद करना दर्शाता है कि नागरिक प्रौद्योगिकियाँ कितनी जल्दी राजनयिक अस्त्र बन जाती हैं।
एक बार जब आप अमेरिकी इंजन खरीदते हैं, आपको अमेरिकी रखरखाव अनुबंध [Maintenance contracts] चाहिए। आपको पुर्जे चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम चाहिए। दशकों के उन्नयन मार्ग चाहिए। प्रारंभिक बिक्री काँटा है। जो मशीनरी उसके बाद आती है वह मायने रखती है।
भारत का तेजस उत्पादन दो जेट पर रुका, भारतीय अक्षमता के कारण नहीं बल्कि अमेरिकी आपूर्ति नियंत्रण के कारण। यह पारिस्थितिकी तंत्र जकड़न स्विचिंग लागत को निषेधात्मक बनाती है। अब ब्रिटेन और फ्रांस जेट इंजन उत्पादन से संबंधित हस्तांतरण प्रौद्योगिकी पर भारत के साथ वार्ता कर रहे हैं। HAL और रूस के UAC ने भारत में SJ-100 नागरिक विमान उत्पादन के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सब अमेरिका से विच्छेदन का अर्थ है।
चिकित्सा साम्राज्यवाद
अमेरिकी पेटेंट कानून [Patent laws] जीवन-रक्षक दवाओं को अवहनीय रखते हैं। मामूली रासायनिक परिवर्तन दशकों के लिए एकाधिकार बढ़ाते हैं। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2013 में Novartis के Glivec पेटेंट [कैंसर की दवा का पेटेंट] को इसलिए अस्वीकार किया क्योंकि परिवर्तन उस कैंसर दवा को नियंत्रित करने को उचित नहीं ठहराता था जिसकी लोगों को आवश्यकता थी।
COVID प्रतिक्रिया ने व्यवस्था की वास्तविक प्रकृति उजागर की। अमेरिका ने घरेलू रूप से टीके जमा करते हुए भारत की टीका इनपुट आपूर्ति अवरुद्ध की। केवल तब जब भारत के NSA ने कथित रूप से मुंबई से औषधि निर्यात के लिए महत्वपूर्ण इनपुट रोकने की धमकी दी, आपूर्ति फिर शुरू हुई। साम्राज्य ने वैश्विक स्वास्थ्य से नियंत्रण को प्राथमिकता दी। उपचार शक्ति के उत्तोलन में बदल गया।
कंप्यूटिंग और डेटा वर्चस्व [Data dominance]
IBM की प्रारंभिक व्यवस्थाओं ने केवल व्यापार उत्पादकता नहीं बढ़ाई। उन्होंने पेंटागन रसद संचालित किया। सिलिकॉन वैली संयोगवश वैश्विक मानक-निर्धारक नहीं बनी।
NSA के PRISM कार्यक्रम [NSA का गुप्त इंटरनेट निगरानी कार्यक्रम] ने वैश्विक संचार में प्रवेश किया जबकि Google और Amazon जैसी कंपनियाँ विश्वभर में डेटा प्रवाह नियंत्रित करती थीं। देशों ने अमेरिकी हार्डवेयर और प्रोटोकॉल अपनाए यह सोचकर कि वे स्वतंत्र तकनीकी विकल्प बना रहे हैं। वास्तव में, वे अपनी डिजिटल अवसंरचना में अमेरिकी निगरानी क्षमताएँ अंतर्निहित कर रहे थे।
चोरी निरंतर होती है। WhatsApp आपके संदेश पढ़ता है। Facebook उस डेटा का उपयोग आपको उन चीजों के विज्ञापन से लक्षित करने के लिए करता है जिनकी आपने निजी ईमेल में चर्चा की। Gmail आपके संदेश पढ़ता है और सामग्री के आधार पर विज्ञापन परोसता है। एक व्यक्ति को पुरानी कार बेचने के बारे में ईमेल मिलते हैं। उन्हें पुरानी कारों के विज्ञापन मिलते हैं। इसलिए नहीं कि उन्होंने पुरानी कारें खोजीं। इसलिए कि Gmail ने उनके निजी ईमेल पढ़े और वह जानकारी विज्ञापनदाताओं को बेची।
निगरानी पृष्ठभूमि में होती है जबकि उपयोगकर्ता मानते हैं कि उन्हें निःशुल्क सेवा मिल रही है। वे ग्राहक नहीं हैं। वे विज्ञापनदाताओं को बेचे जाने वाले उत्पाद हैं।
भारत सरकार ने ईमेल को स्वदेशी Zoho में स्थानांतरित किया और सार्वजनिक रूप से निर्णय की घोषणा की। गृह मंत्री ने इसके बारे में tweet किया। प्रौद्योगिकी और शिक्षा मंत्री ने Zoho office suite [भारतीय सॉफ्टवेयर सुइट] अपनाने के लिए Microsoft word/365 छोड़ा। इस पुस्तक का अंतिम संपादन Zoho पर है और यह Microsoft word से कहीं आगे है।
Zoho नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में डेटा केंद्रों वाली एक भारतीय कंपनी है। सभी विकास आंतरिक है। कोई डेटा विक्रय नहीं। कोई अमेरिकी निगरानी अंतर्निहित नहीं।
वास्तविक संकेत Arattai के माध्यम से आया, Zoho का WhatsApp को उत्तर। सरकारी समर्थन के बाद, साइन-अप प्रतिदिन 3,000 से 3,50,000 तक उछल गए। यह Apple के store पर शीर्ष ऐप बन गया। नागरिक बड़े पैमाने पर अमेरिकी संदेश मंचों से भारतीय विकल्पों की ओर जा रहे हैं। यह प्रतिरोध नहीं है। यह वास्तविक समय में हो रहा विच्छेदन है।
चीन ने व्यापक कार्रवाई की, एक साथ अनेक क्षेत्रों में समांतर व्यवस्थाएँ निर्मित कीं। Baidu Google को टक्कर देता है। WeChat Facebook की जगह लेता है। TikTok YouTube को चुनौती देता है। भारत का ONDC डिजिटल वाणिज्य [Digital commerce] को लोकतांत्रिक बनाने की एक पहल है। यह अमेरिकी मंच एकाधिकार [Platform monopolies] से बचने का जानबूझकर किया गया प्रयास है।
अंतरिक्ष की ऊँची भूमि
अमेरिका की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ प्रेरणादायक चंद्रमा अवतरण से बहुत आगे गईं। उपग्रहों ने वैश्विक निगरानी नेटवर्क सक्षम किए। GPS ने नागरिक नेविगेशन सेवाएँ प्रदान करते प्रतीत होते हुए सटीक सैन्य प्रहारों का मार्गदर्शन किया।
जब अमेरिका ने 1999 के कारगिल संघर्ष [Kargil War - 1999 का भारत-पाकिस्तान युद्ध] के दौरान भारत को GPS डेटा से वंचित किया, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का वास्तविक रणनीतिक उद्देश्य प्रकट हुआ। भारत की प्रतिक्रिया में लगभग दो दशक लगे। NAVIC [Navigation with Indian Constellation - भारतीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली] 2018 तक GPS सटीकता को टक्कर देने वाले सात उपग्रहों के साथ परिचालन में आया।
चीन की BeiDou [चीन की उपग्रह नेविगेशन प्रणाली] नेविगेशन व्यवस्था GPS के समान सटीकता के साथ वैश्विक कवरेज प्रदान करती है। रूस, ईरान और चीन नियमित रूप से अमेरिकी उपग्रह संकेतों को जाम करते हैं, तकनीकी लाभों को रणनीतिक दुर्बलताओं में बदलते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र से बहिष्कार के बाद चीन ने अकेले Tiangong केंद्र निर्मित किया। यह कागज पर निर्मित साम्राज्य से एक और विच्छेदन है।
दूरसंचार
AT&T के ट्रांजिस्टर आविष्कार ने केवल मोबाइल फोन सक्षम नहीं किए। इसने अमेरिकी मानकों के अंतर्गत संपूर्ण दूरसंचार क्रांति [Telecom revolution] उत्पन्न की। अमेरिकी उपग्रहों ने दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ा जबकि सैन्य बलों ने सुरक्षित संचार लाइनें बनाए रखीं।
सुरक्षा निहितार्थ विशाल हैं। सरकारें निगरानी जोखिमों के कारण संवेदनशील बैठकों के दौरान नियमित रूप से फोन जब्त करती हैं। हर कॉल, पाठ और डेटा पैकेट संभावित रूप से अमेरिकी-नियंत्रित अवसंरचना से होकर गुजरता है।
अब Huawei के माध्यम से चीन के पास मोबाइल के लिए अपना OS है, रूस के पास Aurora है और भारत ने BharatOS [भारतीय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम] की घोषणा की है, जो Android का एक रूपांतर है। 2025 में रूस ने लैपटॉप और कंप्यूटरों के लिए OS के रूप में Aurora भी लॉन्च किया है। ये सब साम्राज्य की लंबी भुजा से विच्छेदन के लिए हैं।
सांस्कृतिक प्रोग्रामिंग
हॉलीवुड केवल मनोरंजन नहीं करता। यह वैश्विक आकांक्षाओं और कथाओं को आकार देता है। पूर्व भारतीय खुफिया प्रमुख विक्रम सूद के शोध के अनुसार, पेंटागन की देखरेख सुनिश्चित करती है कि फिल्म सामग्री रक्षा उद्देश्यों के अनुरूप हो। Top Gun सैन्य प्रौद्योगिकी की महिमा करता है। Marvel फिल्में विश्वभर में अमेरिकी व्यक्तिवाद [American individualism] को बढ़ावा देती हैं।
विकृति व्यवस्थित है। भारत को चित्रित करने वाली फिल्में शेष 1.39 अरब लोगों की वास्तव में भिन्न वास्तविकताओं के बावजूद कुछ लाखों की निर्धनता पर केंद्रित हैं। यह आकस्मिक गलत प्रतिनिधित्व नहीं है। यह रणनीतिक कथा नियंत्रण है।
समस्या तब उत्पन्न होती है जब हॉलीवुड को भारत में प्रदर्शन के लिए अपनी फिल्म हिंदी में डब करना पड़ता है। हिंदी में सूक्ष्म अमेरिकी प्रशंसा को नियंत्रित करना कठिन है। दर्शक ध्यान देते हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधान
अमेरिकी विश्वविद्यालय संयोगवश वैश्विक अनुसंधान नेता नहीं बने। जैसा कि शिक्षा पर अध्याय में चर्चा की गई, मैनहट्टन परियोजना ने प्रतिमान स्थापित किया।
अनुसंधान वित्तपोषण बौद्धिक निर्भरता उत्पन्न करता है। वैश्विक विश्वविद्यालय अपनी अनुसंधान प्राथमिकताओं को अमेरिकी वित्तपोषण अवसरों के साथ संरेखित करते हैं। वैकल्पिक अनुसंधान मार्ग संसाधनों से वंचित रह जाते हैं। किंतु अमेरिकी विशेषज्ञता विश्वसनीयता खो रही है।
क्षमता अंतराल
अमेरिकी तकनीकी वर्चस्व का प्रारूप निरंतर नवाचार लाभ मानता है। किंतु क्या होता है जब प्रतिस्पर्धी केवल विकल्प नहीं बनाते। वे बेहतर विकल्प बनाते हैं।
रूस ने 2018 में हाइपरसोनिक मिसाइलें [Hypersonic missiles - ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक तेज मिसाइलें] तैनात कीं। भारत ने 2020 में हाइपरसोनिक [Hypersonic] व्यवस्थाओं का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। चीन अनेक हाइपरसोनिक मंच संचालित करता है। अमेरिका के हाइपरसोनिक कार्यक्रम बार-बार विफलताओं के साथ परीक्षण चरण में हैं। पेंटागन स्वीकार करता है कि परिचालन व्यवस्थाएँ वर्षों दूर हैं।
यह सैद्धांतिक नहीं है। रूस और भारत दोनों के पास अभी हाइपरसोनिक प्रहार क्षमता है। अमेरिका इस क्षमता से मेल नहीं खा सकता। इससे भी बुरा, अमेरिका के पास हाइपरसोनिक मिसाइलों के विरुद्ध कोई रक्षा नहीं है।
घटता नवाचार
अमेरिका का प्रौद्योगिकी साम्राज्य सैन्य विजय पर निर्मित साम्राज्यों की भाँति उसी मूलभूत चुनौती का सामना करता है। लाभ अस्थायी है। एक बार जब प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से मेल खाते हैं, निर्भरता श्रृंखलाएँ विपरीत दिशा में काम कर सकती हैं।
मूलभूत अंतर यह है कि इस्पात और बारूद दृश्यमान खतरे हैं। प्रौद्योगिकी नहीं थी, जब तक सारा दिखावा नहीं छोड़ा गया और इसे खुलेआम कच्चे सामरिक लाभों के लिए अस्त्र नहीं बनाया गया। यह एक मूर्खतापूर्ण विचार था किंतु ऐसा तब होता है जब कोई नियंत्रण में नहीं होता।
किंतु अमेरिका एक सैन्य महाशक्ति है। यह विश्वव्यापी विस्मय उत्पन्न करता है। प्रौद्योगिकी के संकुचन के युग में यह कैसे आगे बढ़ेगा। हम अगले अध्याय में सैन्य महाशक्ति की स्थिति पर चर्चा करेंगे।
Leave a Response