शिक्षा जाल
अज्ञानता के निर्माण में समय और प्रयास लगता है।
शिक्षा एक आधुनिक राष्ट्र की आधारशिला है, जो उसके राष्ट्रीय चरित्र और पहचान को आकार देती है। जो देश नागरिकों को शिक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहते हैं, वे मानवीय क्षमता बर्बाद करते हैं और समग्र रूप से राष्ट्र का भविष्य बलिदान करते हैं। व्यापक शैक्षणिक प्रणालियों [Academic systems] के माध्यम से ही देश वास्तविक नेता विकसित करते हैं जो राष्ट्र को प्रगति, एकता और सफलता की ओर मार्गदर्शन करने में सक्षम हों।
योग्यता से सैन्य तक
अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने एक बार वास्तविक उत्कृष्टता के माध्यम से वैश्विक प्रमुखता प्राप्त की। हार्वर्ड, MIT और स्टैनफोर्ड ने शैक्षणिक स्वतंत्रता, योग्यता-आधारित प्रवेश [Merit-based admission] और अभिनव अनुसंधान वातावरण के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित किया। कार्नेगी और रॉकफेलर के निजी दान ने सरकारी हस्तक्षेप के बिना अग्रणी कार्य को वित्तपोषित किया।
यह जैविक आकर्षण स्वाभाविक रूप से अमेरिकी हितों की सेवा करता था। विश्वभर की प्रतिभाशाली बुद्धियाँ ऐसे वातावरण में अध्ययन करना चाहती थीं जो सफलता की सोच को पोषित करता था।
मैनहट्टन परियोजना [Manhattan Project - परमाणु बम बनाने का अमेरिकी गुप्त सैन्य अभियान] ने सब कुछ बदल दिया। हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम सिद्ध करते हैं कि विश्वविद्यालय शिक्षा से परे रणनीतिक उद्देश्यों की सेवा कर सकते हैं। वैज्ञानिक ज्ञान सैन्य शक्ति बन गया। अकादमिक अनुसंधान राष्ट्रीय संपत्ति बन गया।
यह रूपांतरण जानबूझकर था। शिकागो विश्वविद्यालय ने पहली नियंत्रित परमाणु अभिक्रिया प्राप्त की। बर्कले की विकिरण प्रयोगशाला ने यूरेनियम संवर्धन [Uranium enrichment] तकनीकें विकसित कीं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने गैसीय विसरण [Gaseous diffusion] विधियाँ परिपूर्ण कीं। MIT ने रडार प्रौद्योगिकी में योगदान दिया।
इस सहयोग ने एक प्रतिमान स्थापित किया। विश्वविद्यालय बौद्धिक पूंजी [Intellectual capital] प्रदान करते हैं। सेना वित्तपोषण और दिशा प्रदान करती है। उद्योग उत्पादन को बड़े पैमाने पर करता है। परिणाम शुद्ध ज्ञान या जनसाधारण तक उसके प्रसार के बजाय साम्राज्य हितों की सेवा करता है।
शीत युद्ध एकीकरण
1957 में स्पुतनिक ने अमेरिकी नेतृत्व को भयभीत किया। सोवियत तकनीकी उपलब्धि ने सुझाया कि अमेरिका अपना रणनीतिक लाभ खो सकता है। प्रतिक्रिया त्वरित और विशाल थी।
राष्ट्रीय रक्षा शिक्षा अधिनियम ने 1958 में विश्वविद्यालय STEM कार्यक्रमों को बढ़ाने के लिए $1 अरब आवंटित किए। DARPA [Defense Advanced Research Projects Agency - अमेरिकी सैन्य अनुसंधान एजेंसी] ने अपनी स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय अनुसंधान में $200 अरब से अधिक प्रवाहित किए हैं। वित्तपोषण शर्तों के साथ आया। अनुसंधान प्राथमिकताएँ पेंटागन उद्देश्यों के अनुरूप हो गईं।
विश्वविद्यालय संघीय अनुबंधों पर निर्भर हो गए। MIT के 2023 बजट में $4.1 अरब के अनुसंधान व्यय शामिल थे। साठ प्रतिशत संघीय स्रोतों से आया। 1951 में स्थापित लिंकन प्रयोगशाला पूरी तरह सैन्य अनुप्रयोगों पर केंद्रित है। धन ने प्राथमिकताएँ बदल दीं।
यह एकीकरण गहराई तक चलता है। जो विश्वविद्यालय एक बार महत्वपूर्ण स्वायत्तता [Autonomy - स्वतंत्रता] के साथ संचालित होते थे, अब रणनीतिक हितों की सेवा करते हैं।
वियतनाम समस्या
वियतनाम युद्ध विरोधों ने एक असुविधाजनक सत्य प्रकट किया। वित्तीय सुरक्षा वाले शिक्षित छात्र सरकारी कथाओं पर प्रश्न उठाते हैं। परिसर प्रदर्शनों ने स्वतंत्रता की रक्षा के बारे में आधिकारिक वक्तव्य और दक्षिण-पूर्व एशिया में वास्तविक नागरिक नरसंहारों के मध्य अंतर उजागर किए।
युद्ध-विरोधी आंदोलन ने एक वैधता संकट उत्पन्न किया जिसे सैन्य व्यय हल नहीं कर सकता था। 1945 के बाद पहली बार, महत्वपूर्ण संख्या में अमेरिकियों ने न केवल विशिष्ट नीतियों पर बल्कि वैश्विक हस्तक्षेप के पूरे ढाँचे पर प्रश्न उठाए।
अमेरिकी नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण पाठ सीखा। एक शिक्षित, वित्तीय रूप से सुरक्षित जनसंख्या साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं के लिए खतरा है। प्रतिक्रिया व्यवस्थित और क्रूर थी।
रेगन के शिक्षा सलाहकार रॉजर फ्रीमैन ने 1970 में समस्या स्पष्ट रूप से बताई: "हम एक शिक्षित सर्वहारा वर्ग [Proletariat - श्रमिक वर्ग / आम लोग] उत्पन्न करने के खतरे में हैं। यह विस्फोटक है! हमें यह चुनाव करना होगा कि हम किसे कॉलेज जाने की अनुमति दें।"
यह स्पष्ट मान्यता थी। निःशुल्क उच्च शिक्षा ऐसे नागरिक उत्पन्न करती है जो आलोचनात्मक विश्लेषण में सक्षम हों। ऐसे नागरिक साम्राज्यवादी नीति के लिए संभावित खतरा बनते हैं। समाधान था शिक्षा को सार्वजनिक वस्तु [Public good] से निजी वस्तु [Private good] में रूपांतरित करना।
रेगन की बहु-पीढ़ीगत रणनीति
1960 के दशक में कैलिफोर्निया गवर्नर के रूप में, रेगन ने सुलभ उच्च शिक्षा के व्यवस्थित उन्मूलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने राज्य विश्वविद्यालयों के वित्तपोषण में कटौती की। उन्होंने ट्यूशन लागत नाटकीय रूप से बढ़ाई।
युद्ध-विरोध के प्रतीक बने बर्कले के छात्रों ने खुद को विदेश नीति का विश्लेषण करने के बजाय शिक्षा का भुगतान करने पर तेजी से केंद्रित पाया। रणनीति पूरी तरह सफल रही।
रेगन का दृष्टिकोण बहु-पीढ़ीगत युद्ध का प्रतिनिधित्व करता था। इसने सुनिश्चित किया कि भावी छात्र आलोचनात्मक सोच कौशल विकसित करने के लिए आर्थिक रूप से जकड़े रहें। दशकों तक चलने वाले ऋण बोझ उत्पन्न किए। स्नातकों को शक्ति पर प्रश्न उठाने के बजाय जीवित रहने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए विवश किया।
जो माता-पिता उच्च शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते, वे अपने बच्चों को कॉलेज प्रवेश प्रक्रियाओं के माध्यम से मार्गदर्शन नहीं कर सकते। ऋण चक्रों में जकड़े परिवार अपने बच्चों के लिए शैक्षणिक अवसरों में निवेश नहीं कर सकते। इस बीच, धनी परिवार पीढ़ियों में शैक्षणिक लाभ संचित करते हैं।
अंतर समय के साथ व्यवस्थित रूप से बढ़ता है। प्रत्येक पीढ़ी शिक्षित अभिजात और संघर्षरत जनसाधारण के मध्य अधिक पृथकता देखती है। सामाजिक गतिशीलता [Social mobility - समाज में आर्थिक व सामाजिक स्तर का ऊपर उठना] असाधारण व्यक्तिगत परिस्थितियों के बिना असंभव हो जाती है। जन्म की परिस्थितियाँ व्यक्तिगत योग्यता या प्रयास की तुलना में जीवन परिणाम अधिक विश्वसनीय रूप से निर्धारित करती हैं।
छँटाई मशीन
अमेरिका विश्व की सबसे परिष्कृत जनसंख्या छँटाई प्रणाली चलाता है। यह प्रतिवर्ष K-12 शिक्षा [Kindergarten to 12th grade - बालवाड़ी से 12वीं तक की स्कूली शिक्षा] के माध्यम से 5.7 करोड़ बच्चों को संसाधित करता है। केवल 2 करोड़ विश्वविद्यालयों तक पहुँचते हैं। अन्य 1.2 करोड़ को व्यावसायिक प्रशिक्षण [Vocational training] मिलता है। शेष 2.5 करोड़ को केवल मूलभूत शिक्षा और आर्थिक दबाव मिलता है।
यह आकस्मिक नहीं है। यह अभिकल्पना है।
यह व्यवस्था अभिजात पदों के लिए प्रतिस्पर्धियों को उनके उन कौशल विकसित करने से पहले समाप्त करती है जो स्थापित शक्ति को चुनौती दे सकते हैं। उच्च शिक्षा में आर्थिक बाधाएँ स्थायी वर्ग विभाजन उत्पन्न करती हैं।
भारत से तुलना अमेरिकी प्राथमिकताएँ प्रकट करती है। IIT शिक्षा निजी तौर पर 1.5 से 2 लाख प्रति वर्ष है। किंतु योग्य छात्र सब्सिडी के माध्यम से केवल ₹45,000 वार्षिक देते हैं। भारत पारिवारिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रतिभा में निवेश करता है। अमेरिका वंशानुगत आर्थिक वर्ग [Hereditary economic class] के आधार पर छँटाई करता है।
यह गहरी रणनीतिक मूर्खता है। प्रतिभा आर्थिक वर्गों में यादृच्छिक रूप से वितरित होती है। जो व्यवस्थाएँ वंशानुगत धन के पक्ष में योग्यता को नजरअंदाज करती हैं, वे मानवीय क्षमता बर्बाद करती हैं।
नियंत्रण के तीन स्तर
व्यावसायिक प्रशिक्षण स्तर कुशल श्रमिक प्रदान करता है जो व्यापक उद्देश्यों पर प्रश्न उठाए बिना आदेशों का पालन करते हैं। ये 1.2 करोड़ छात्र व्यावहारिक कौशल सीखते हैं किंतु रणनीतिक सोच नहीं। वे आर्थिक कार्य के लिए आवश्यक बनते हैं जबकि राजनीतिक निर्णय निर्माण से बाहर रहते हैं।
शेष जनसंख्या मूलभूत शिक्षा प्राप्त करती है जो आज्ञाकारी श्रमिक उत्पन्न करने के लिए अभिकल्पित है जिनके पास जटिल नीति मुद्दों को समझने के विश्लेषणात्मक साधन नहीं हैं।
विश्वविद्यालय प्रबंधक और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव अभिकर्ता उत्पन्न करते हैं। व्यावसायिक विद्यालय कुशल अनुपालन [Compliance - आज्ञाकारिता / शर्तों का पालन] उत्पन्न करते हैं। मूलभूत शिक्षा सामूहिक आज्ञाकारिता उत्पन्न करती है। प्रत्येक स्तर साम्राज्य कार्यों की सेवा करता है जबकि यह विश्वास करता है कि उसने अपना शैक्षणिक मार्ग स्वतंत्र रूप से चुना।
ऋण जाल सभी स्तरों में अनेक उद्देश्य पूरे करता है। जीवन-यापन पर केंद्रित छात्र वे विश्लेषणात्मक कौशल विकसित नहीं कर सकते जो स्थापित कथाओं को खतरे में डालें। ऋण से बोझिल स्नातक ऐसे करियर का खर्च नहीं उठा सकते जो शक्ति संरचनाओं को चुनौती दें। यदि कोई कथा को चुनौती देने का साहस करता है तो उसके कार्य को पक्षपातपूर्ण कहा जाएगा।
वर्तमान छात्र राजनीतिक विश्लेषण के बजाय जीवन-यापन पर ध्यान केंद्रित करते हैं। वे शिक्षा लागत वहन करने के लिए अनेक नौकरियाँ करते हैं। परिणाम है सक्रिय दमन के बिना राजनीतिक अनुपालन। किसी सरकारी एजेंसी को छात्र कार्यकर्ताओं की निगरानी या उन्हें डराने की आवश्यकता नहीं है। आर्थिक दबाव समान उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त करता है।
विभाजन के रूप में पाठ्यक्रम
अमेरिका ने राष्ट्रीय एकता नष्ट करने के लिए शिक्षा को अस्त्र बनाया। भिन्न राज्य अब परस्पर शत्रुतापूर्ण वास्तविकता के संस्करण पढ़ाते हैं। यह आकस्मिक नहीं था। यह एक रणनीति है।
कैलिफोर्निया पीड़ितता की कथाओं के माध्यम से बच्चों को अमेरिका से घृणा करना सिखाता है। टेक्सास गौरव मिथकों के माध्यम से बच्चों को अमेरिका की पूजा करना सिखाता है। दोनों दृष्टिकोण एक ही कार्य करते हैं। वे साम्राज्य वास्तव में कैसे संचालित होता है, इसकी एकीकृत समझ को रोकते हैं।
कैलिफोर्निया के छात्र सीखते हैं कि अमेरिका उत्पीड़न के बराबर है। टेक्सास के छात्र सीखते हैं कि अमेरिका स्वतंत्रता के बराबर है। न तो समूह सीखता है कि अमेरिकी शक्ति वास्तव में वैश्विक रूप से कैसे कार्य करती है। दोनों को विश्लेषणात्मक कौशल के बजाय भावनात्मक प्रोग्रामिंग मिलती है।
यह विखंडन स्थापित हितों की पूरी तरह सेवा करता है। जो नागरिक मूलभूत ऐतिहासिक तथ्यों पर सहमत नहीं हो सकते, वे प्रभावी राजनीतिक विरोध संगठित नहीं कर सकते। वे साम्राज्यवादी नीतियों पर प्रश्न उठाने के बजाय एक-दूसरे से लड़ते हैं।
यह शैक्षणिक व्यवस्थाओं के माध्यम से लागू परिष्कृत बाँटो और राज करो [Divide and rule] की रणनीति है। असंगत जनजातीय पहचानें [Incompatible tribal identities] उत्पन्न करो। सुनिश्चित करो कि भिन्न क्षेत्र ऐसे नागरिक उत्पन्न करें जो संवाद नहीं कर सकते।
भारतीय कहावत इसे पूरी तरह कहती है। बंदर के हाथ में उस्तरा। शिक्षक वह उस्तरा पकड़ता है जो मस्तिष्कों को जनजातीय घृणा या विश्लेषणात्मक स्पष्टता की ओर काट सकता है।
माता-पिता अपने बच्चों को इस मनोवैज्ञानिक युद्ध से नहीं बचा सकते। विद्यालयों में बच्चे 12 वर्षों तक साप्ताहिक 40 घंटे होते हैं।
निर्मित सहमति
चॉम्स्की की निर्मित सहमति [Manufacturing Consent] के बारे में चेतावनियाँ शिक्षा नीति पर लागू होने पर भविष्यसूचक [Prophetic] सिद्ध होती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक समाजों को परिष्कृत प्रचार प्रणालियों की आवश्यकता होती है क्योंकि नागरिकों को अकेले बल के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। शिक्षा ऋण जाल इस दृष्टिकोण की परिपूर्णता है।
पारंपरिक प्रचार के लिए सार्वजनिक समर्थन बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। किंतु ऋण-आधारित शिक्षा समस्या को उसके स्रोत पर ही समाप्त करती है। साम्राज्यवादी नीतियों का समर्थन करने के लिए मीडिया नियंत्रण और संस्थागत संदेशों के माध्यम से नागरिकों को मनाने के बजाय, व्यवस्था सार्थक विरोध में सक्षम नागरिकों को ही समाप्त कर देती है।
नागरिक मतदान अधिकार बनाए रखते हैं किंतु उन्हें प्रभावी ढंग से उपयोग करने के विश्लेषणात्मक कौशल नहीं हैं। जब मतदाता नीति निहितार्थों को नहीं समझ सकते तो राजनीतिक चुनाव नाटक बन जाता है। लोकतंत्र जारी रहता है जबकि केवल साम्राज्य के अभिजात हितों की सेवा करता है।
अंतर्राष्ट्रीय करद्दाता व्यवस्था
ये संख्याएँ अमेरिकी प्राथमिकताओं के बारे में कुछ गहरा प्रकट करती हैं। जो देश अवसर का समर्थन करने का दावा करता है वह वास्तव में अपने अधिकांश नागरिकों को इससे वंचित करता है। जबकि प्रतिवर्ष 11 लाख अंतर्राष्ट्रीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों से होकर गुजरते हैं, घरेलू परिवार उसी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते जिसे उनके करों ने एक बार समर्थित किया था।
अधिकांश ऐसे देशों के धनी परिवारों से आते हैं जहाँ विनिमय दरें शैक्षणिक निवेश का पक्ष लेती हैं। ये छात्र अमेरिकी करदाताओं के धन से बनी सुविधाओं का उपयोग करके विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करते हैं। अधिकांश अमेरिकी विश्लेषणात्मक ढाँचे और व्यावसायिक नेटवर्क लेकर घर वापस जाते हैं। वे नेतृत्व पदों पर उठते हैं जबकि अमेरिकी संस्थाओं से संबंध बनाए रखते हैं।
इस बीच, अमेरिकी परिवार उसी शिक्षा का खर्च नहीं उठा सकते जिसे उनके करों ने समर्थित किया। घरेलू प्रतिभा आर्थिक बाधाओं द्वारा समाप्त की जाती है जबकि विदेशी छात्र अभिजात संस्थागत संसाधनों तक पहुँचते हैं।
भारत जैसे देश भारतीय परिवारों में शिक्षा में निवेश करके अमेरिकी साम्राज्यवादी हितों को सब्सिडी देते हैं जो अपने बच्चों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों के लिए तैयार करती है। भारतीय करदाता IIT कार्यक्रमों को वित्तपोषित करते हैं जो ऐसे अभियंताओं को प्रशिक्षित करते हैं जो प्रायः अमेरिका प्रवासित हो जाते हैं। भारत लागत वहन करता है जबकि अमेरिका लाभ प्राप्त करता है।
यह शैक्षणिक नीति के माध्यम से करद्दाता निष्कर्षण [Tributary extraction / Taxpayer extraction] है। विकासशील देश मानव पूंजी में निवेश करते हैं जिसे विकसित देश आप्रवासन [Immigration] और मस्तिष्क-पलायन [Brain drain] के माध्यम से काटते हैं।
रणनीतिक अंधापन
अमेरिकी शिक्षा नीति चतुर जनसंख्या नियंत्रण के रूप में प्रच्छन्न गहरी रणनीतिक मूर्खता प्रदर्शित करती है। अल्पकालिक साम्राज्य हित दीर्घकालिक राष्ट्रीय शक्ति [National power] को नजरअंदाज करते हैं।
जो देश पारिवारिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना योग्यता को पोषित करते हैं, वे उन व्यवस्थाओं पर संचयी लाभ [Cumulative advantage] अर्जित करते हैं जो मानवीय क्षमता बर्बाद करती हैं। भारत की IIT सब्सिडियाँ असाधारण प्रतिभाओं को पहचानती और विकसित करती हैं जो अन्यथा निर्धनता में जकड़ी रह सकती थीं। अमेरिका की ऋण व्यवस्था समान प्रतिभा को विकसित होने से पहले समाप्त कर देती है।
परिणाम अल्पकालिक साम्राज्य हितों की सेवा करता है किंतु दीर्घकालिक राष्ट्रीय शक्ति [National power] को कमजोर करता है। जो समाज अपने गरीब बच्चों को छोड़ देता है वह अनिश्चित काल तक तकनीकी नेतृत्व बनाए नहीं रख सकता।
जाल तोड़ना
शिक्षा जाल को समझना उससे बाहर निकलने का पहला कदम है। अमेरिकियों को यह पहचानना होगा कि वर्तमान नीतियाँ नागरिक कल्याण के बजाय साम्राज्य हितों की सेवा करती हैं।
वास्तविक सुधार के लिए उन आर्थिक बाधाओं को ध्वस्त करना आवश्यक है जो घरेलू प्रतिभा को विचार से बाहर कर देती हैं। उच्च शिक्षा के लिए सार्वजनिक वित्तपोषण उन स्तरों पर वापस आना चाहिए जो पारिवारिक धन की परवाह किए बिना योग्यता-आधारित चयन की अनुमति दें।
सबसे महत्वपूर्ण, अमेरिकियों को यह पहचानना होगा कि शिक्षा राष्ट्रीय शक्ति की नींव है। यह चुनाव साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं की सेवा करने और नागरिक क्षमताएँ विकसित करने के मध्य है।
विशेषज्ञ कारखाना
यह शिक्षा व्यवस्था एक विशिष्ट प्रकार का विशेषज्ञ उत्पन्न करती है। वे तकनीकी कौशल के साथ स्नातक होते हैं किंतु शक्ति पर प्रश्न उठाने के ढाँचे के बिना। वे अपनी विशेषज्ञता समझते हैं किंतु यह नहीं कि यह व्यापक हितों की सेवा कैसे करती है। वे प्रमाणित अधिकारी बन जाते हैं जो साम्राज्य के निर्णयों को अपनी भूमिका पहचाने बिना वैध ठहराते हैं।
यह समझाता है कि कोई मुख्यधारा विशेषज्ञ वे प्रश्न क्यों नहीं उठाता जो यह पुस्तक जाँचती है। शिक्षा व्यवस्था उन्हें पूछने में सक्षम लोगों को व्यवस्थित रूप से समाप्त करती है। जो फिसलकर बाहर आ जाते हैं और आलोचनात्मक सोच विकसित करते हैं उन्हें आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो उन्हें प्रभाव के पदों तक पहुँचने से रोकती हैं। हम अगले अध्याय में अर्थशास्त्र में इस विषैली विशेषज्ञता के बारे में अधिक चर्चा करेंगे।
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